Thursday, August 8, 2024
कला समाज की चेतना को दर्शाने वाला एक मार्मिक दर्पण है। समाज मे चल रही कुछ घटनाओं को मैंने अपने पेंटिंग के माध्यम से व्यक्त करने का कोशिश किया है।
शीर्षक : कोमलता बहुत सख्त होती है
एक मनुष्य समाज में अपने कर्म से ही अपना महत्व स्थापित करता है ।
बात उनमें कुछ स्त्रियों की करें तो वह अपना वजूद खड़ा करने के लिए कई तरह की हथकंडे भी अपनाती है। जिसमें कुछ तो नेक रास्ता चुनती है तो वहीं कुछ फरेब भरा ...।
निदा फ़ाज़ली के शेर की एक लाइन है "हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी..."
इस पेंटिंग में मैंने औरत के इसी रूप को दर्शाया है। जिस प्रकार एक लता किसी अच्छे खासे पेड़ को धीरे-धीरे लपेटकर उसपर पूरी तरह अपना आधिपत्य जमा लेती है,
ठीक उसी प्रकार कुछ स्त्रियां भी अपनी शारिरिक आकर्षण के बल से एक पुरूष को मोह जाल में फंसा लेती है।
इस सम्मोहन में फंसकर वह पुरुष धीरे-धीरे स्वंय को खो चुका होता है।
इतना कुछ होने के बाद भी एक विरला पुरूष वही है जो इन झंझावातों से लड़कर नए सकारात्मक ऊर्जा के साथ एक नई जिंदगी की शुरुआत करे...।
कोमल का स्वभाव अति हो जाने के बाद बहुत ही सख्त हो जाता है, वह व्युत्क्रम ऊर्जा प्रदान कर आपको खत्म करने की कोशिश में लगी रहती है ।
अतः किसी के कोमल स्वभाव पर नहीं चलना चाहिए और हमें अपनी समझदारी से जीवन में आगे बढ़ते रहना चाहिए...।
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